Sunday, 8 May 2011

बेउर, पटना के बन्दियों हेतु निशुल्क चिकित्सा शिविर एवं सद्गुणों से युक्त जीवन जीने की सद्प्रेरणा


श्री सर्वेश्वरी समूह, अवधूत भगवान् राम कुष्ठ सेवा आश्रम, पड़ाव, वाराणसी के सौजन्य से दिनांक १७ अप्रेल २०११ दिन रविवार को केन्द्रीय कारगर बेउर, पटना में निरुद्ध कैदी बन्धुवों के बीच निशुल्क स्वास्थ्य  शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन पूर्व संसद किशोरी सिन्हा जी, नागालैंड ले महामहिम राज्यपाल श्री निखिल कुमार जी एवं श्री सतीश कुमार जी(अग्रज - माननीय मुख्यमंत्री, बिहार) द्वारा परमपूज्य अघोरेश्वर महाप्रभु एवं पूज्यपाद बाबा गुरुपद संभव राम जी चित्र पर माल्यार्पण, पूजन व् दीप प्रज्वलित कर किया गया |


इस शिविर में बिभिन्न रोगों के कुल १५०० कैदी बन्धुवों का निशुल्क इलाज आयुर्वेदिक, एलोपैथिक, होमोपैथिक दावा निशुल्क वितरित की गयी | अस अवसर पर जेल अधिकारी श्री ओमप्रकाश गुप्ता जी ने श्री सर्वेश्वरी समूह से हर्निया, हएद्रोशील, दन्त रोग एवं बवाशीर के आपरेशन की सुविधा मुहैया करने की गुजारिश की | इस अवसर पर कैदियों ने बुरे कामों को छोड़कर पूज्य बाबा के आदर्शो पर चलने का संकल्प लिया | युवा कैदियों ने रक्तदान करने की भी इच्छा ब्यक्त की | कार्यक्रम के अंत में सम्मानित अतिथियों द्वारा कैदी बंधुयों के बीच अघोर साहित्य एवं फल वितरण किया गया |  

Saturday, 7 May 2011

आशीर्वचन



इसमें गुंजाइश नहीं है - गुरु के प्रति अगौरव का भाव रखता हो, धर्म के प्रति अगौरव का भाव रखता हो, सर्वेश्वरी समूह के प्रति अगौरव का भाव रखता हो ; कोई मुडिया साधु या सदस्य गुरु के प्रति गौरव का , धर्म के प्रति गौरव का, किन्तु सर्वेश्वरी समूह के प्रति अगौरव रक्खेगा | यह तीनो में गुरु, धर्म और सर्वेश्वरी समूह में एक के प्रति भी अगौरव का भाव रखता हो तो सभी तीनो धर्म, समूह और गुरु के प्रति भी अगौरव का भाव रक्खेगा | जो अगौरव का भाव रखता है मुडिया या सदस्य, वह उच्छिट ( कहा कर झूठा पत्तल फेका हुआ ) के सद्रश होता है | उससे यह सम्भावना बिलकुल नहीं है की वह हम सभी सवेश्वरी परिवार के लिए गौरव का भाव रक्खेगा | हमें सम्भावना करनी भी नहीं चाहिए |

" पुरुषार्थ ना करने वाला प्राणी ही दरिद्रता को प्राप्त होता है | माँ गुरु के शरण में कोई बता नहीं | आत्मविश्वास ही सफल जीवन की आधारशिला है | सांसारिक भेदभावो के त्याग से ही अमर ज्योति का दर्शन होता है | जीवन अविनाशी है और कर्मफल को भोगना अनिवार्य है | अस्तु, तू सतकर्म-रत रह |"

Friday, 22 April 2011

परिश्रम का दान फलता है !



परिश्रम का दान फलता है लूट का नहीं| बहुत से सेठ लोग मिलावट करते हैं | हल्दी में पीली मिटटी मिलाते हैं | सेठ लोग चोरी करते हैं  और यहाँ आकर दान भी करते हैं | सेठ भी हैं, दानी भी हैं, चोर भी हैं | लूट का रुपया दान देने से भी नहीं फलता | भगवान् भी लूट का रुपया बर्दास्त नही कर सकता | यह दान या पूजा नहीं हैं | कई एक सेठ लोगों को खिला पिला रहे हैं लकिन गरीब मजदूर उनसे कुछ मांगते हैं तो वे एक पैसा नहीं देते हैं | ऐसे लोग इस जमीन पर हैं | दानी भी वही हैं | सुखी भी वही हैं | इनका सब कुछ ब्यर्थ है | दुसरे जन्म में धन के लोभी वेश्या होते हैं और खूब कमाते हैं और बुढौती में गुंडे उनको मर डालते हैं, धन लूट लेते हैं| पापी लोग दुसरे जन्म में ऐसे ही होते हैं | तुलसीदास जी ने कहा है कि धन, दारा, सुत लोग का कारण होता हैं |

                                       साईं इतना दीजिये जमे कुटुंब समाय !
                                       मै भी भूखा ना रहूँ साधू न भूखा जाय !! 

ज्यादा चाहना लोभ है ! 
आपने कुंती के विषय में सुना होगा | भगवान् ने आशीर्वाद देकर कहा कि वर मांगो | कुंती ने कहा कि हे कृष्ण ! हमें जो दुःख विपत्ति है हमेशा बनी रहे | यह नहीं रहेगी तो आपकी याद भूल जाएगी | यदि कुछ देना है तो दुःख और विपत्ति दीजिये कि सदैव आपकी याद रहे | यदि आपकी याद में शारीर छुटेगा तो आपमें विलीन होगा| यदि  ऐश्वर्य में छुटेगा तो विष्ठा का कीड़ा होगा | अनमोल मनुष्य जन्म मिला है | परमात्मा हमें सहन करने कि सक्ति दे | कभी कभी हम बहुत घबडा जाते हैं | अध पेट खाना कहा कर सोना अच्छा है | सेध कहा कर सोता नहीं है | उसके लिए वैध लग जाते हैं | वो लोग जो अध पेट कहा कर सोते हैं उनसे बड़े अच्छे हैं जिनकी दावा दारू के लिए डाक्टर बुलाये जाते हैं | तकलीफ आपको सम्हालने को कहती है | दुःख विपत्ति रास्ता दिखाती है | आपको अच्छे मार्ग पे ले जाती है |

Sunday, 27 February 2011

आलसी बहुए कलह का कारण



सुधर्मा, ग्रामीण ग्रहस्थो के घर-परिवार में कलह का कारन अलसी बहुओ का आगमन, निष्क्रिय बहुयों का आगमन, चोर बहुओ का आगमन, कमजोर बहुओ का आगमन होता है | कहो कैसे ?
एक बहु मसाला पीसने से, सिल लोधा चलने से बचना चाहती है | एक बहु बर्तन मांजने से, घर के फटे पुराने वस्त्र सीने से बचना चाहती है| एक बहु घर के कपडे साफ करने से, नौकर चाकर या अतिथि का सत्कार करने से बचना चाहती है| रुचिकर भोजन देने से और घर की सम्पति में से चोरी करने से घर परिवार में कलह का आगमन होता है | उस घर में भोजन अरुचिकर  लगता है एक दुसरे का असहयोग होने लगता है | एक दुसरे को ताना मरने लगते हैं | वह घर-परिवार अपने आप में अशोभनीय हो जाता है अपने आपमें कलह का निवास हो जाता है, अपने आप में बाट-बटवारा का स्रोत बन जाता है |
सद्ग्रहथो के यहाँ भी विद्या है और अच्छे संस्कार न होने के कारण बहुतेरे घरो में, परिवारों में कलह और बाट बखरा का उदय होना आलसी और निष्क्रिय बहुओ का आगमन ही है सुधर्मा |

Friday, 11 February 2011

आशीर्वचन: परमपूज्य अघोरेश्वर भगवान् राम जी



प्रिय बंधुओ ! प्रकाशपुंज, चैतन्य -जड़ को कभी नहीं प्राप्त होता | मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है जब वह क्रियाशील होता है | यदि वह निष्क्रिय है तो उसका जीवन जडवत है, उसे वह चैतन्य नहीं प्राप्त होता | मनुष्य बहुत ही देव दुर्लभ शारीर है ; ऐसा सास्त्रो का, महात्माओ का कथन है | हम हर एक प्राणी से जो यहाँ उपस्थित हैं, निवेदन करता हूँ, कि अपने जीवन में जीने कि शैली अख्तियार करे और वही जीवन उसका सार्थक हो सकता है | परमेश्वर धुन्धने से नहीं मिलते |हम ऐसा कर्म करे, अपने इंद्रियों को लोलुपता से वंचित रक्खे, परमेश्वर हमें सदैव धुंध करेंगे और वह हमारे बहुत सन्निकट दिखेंगे | हमारे भीतर छिपे हुए जो देवता हैं- उनकी जो प्रेरणा है, हम अवश्य उसपर ध्यान दे |ध्यान करने से बहुत ही अच्छा है | मनुष्य प्राणी हिन्दू , मुसलमान, ईसाई, ब्राम्हण, झत्त्रिय, शूद्र, वैश्य हो जाता है, वह मनुष्य ;आदमी नहीं बनने लिए तैयार है, मनुष्य नहीं बननेके लिए तैयार है |
जब तक वह मनुष्य नहीं बनता है आदमी नहीं बनता है तब तक उसका सभी कुछ बनना उतना सार्थक नहीं है जितना एक क्रियाशील मनुष्य के जीवन में होता है |

Wednesday, 2 February 2011

माघ मेला (@संगम अल्लाहाबाद )


1-परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी


2-ये सायद आपको ही बुला रहे हैं , इनकी बाते हिन् निराली हैं




3-परम पूज्य गुरुपद बाबा




4-संख नाद




photo credit-Ashish Singh(Allahabad)

Saturday, 18 September 2010

Message Of Aghoreshwar


For The Protection Of Falling Rural Culture


Rural brothers! Under the precincts of your village there is the place of GOD.(Temple), Devichowra is there, Sati Choutara is there, Brahma Choutra is there and the sepulcher of great soils. Until and unless you people pay homage to them, worship them and will be gathering within six month or one year for the purpose of special worship, no dispute will take place in your village. Mutual envy and jealousy will not occur. Grains and water will not be found in scarcity, famine will not break out. Feeling of mutual sympathy will be awakened, thieves and scoundrel and sensualists will be found in scanty numbers. they will remain negligible, each rural and urban people will be courteous, patient and beneficial.

Brethern! this is the result of the ignorance of the succeeding generation and the present generation and the uncaring for, negligence, neglect of sepulchers of the great men, Brahma, choutra, Sati Choutra and temples situated in Indian village that is each and every village disease, agony, discontentment, hatred have made there places, thieves, greedy, snatches of of other property are often found and heard.in The villages where such vicious work are done there rules the dispute. Villagers should worship the temples, religious places, Chowras and Samadhis like Worship of ancestors. It'll give all rounded development to the rural areas. the village that performs such practices, the infamous activities of these villages would disappear, will go away, will be wiped off. Glory will dawn upon. people would nurse fraternal feel Ings, they would cultivate friendly feelings. It is called equality , it is preferable to communism in modern century our society, our country and these village have become out of gear, have become restless. Women are the mothers of infants and all who is not available because they have left the motherly qualities and have become narrow-minded. We feel pride that these infants would be our pioneer of nation. It is possible when they should develop naturally, for it is this motherly love, cares and the kind behavior of social people is essential which is impossible to attain.